Thursday, August 27, 2015

'मांझी'

बरसात का मौसम !! कुछ के लिए रूमानी कुछ के लिए तूफानी!! इस बरसात के मेरे दो अनुभव।
दृश्य एक:
शहर के बाहर मूसलाधार बारिश में एक लंबा ट्रैफिक जाम।कारण:बिजली का खंभा टूटकर रोड के किनारे एक मिट्टी के मकान पर गिर गया है,बिजली के तार रोड में बिखरे पड़े हैं,दोनों तरफ लोग खड़े हैं, पर भीगे हुए तारों को छेड़ने का रिस्क कौन ले? निवारण:आधे घंटे बाद जिस व्यक्ति का मकान टूटा है, वह एक लंबे बांस से तार को उठाकर बीच रोड में अधनंगे बदन इस तूफानी बारिश में दृढ़ता से खड़ा है, सभी गाड़ियां उस तार के नीचे से गुजर रही हैं,उसकी पत्नी टूटी हुई खपरैल छत से तार सम्हालने में उसकी सहायता कर रही है।इतना लंबा जाम अंततः समाप्त हुआ।
दृश्य दो:
वही मूसलाधार बारिश।शहर की एक कॉलोनी..और बिजली का वही खंभा।इस बार गिरा एक 'अंकल' के घर की बॉउंड्री वॉल पर। कॉलोनी के घरों का आवागमन बाधित। "अंकल इसे किनारे कर लेते हैं हमारी गाड़ी निकालते बन जायेगी" "अरे पागल हो क्या जब तक बिजली विभाग वाले आकर अपनी आँखों से नहीं देख लेते ये खंभा ऐसे ही रहेगा..मेरी तो बॉउंड्री वॉल गई यार तुमको गाड़ी निकालने की पड़ी है!!"
'मांझी' मिट्टी के मकान में ही रहते हैं बॉउंड्री वॉल के भीतर तो तथाकथित "टैक्स पेयर" ही रहते हैं।

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